कश्मीर में पहलीबार पाकिस्तान की सील लगी हुई मिली क्लेमोर माइन, अमरनाथ यात्रियों को मारने था प्लान

नई दिल्ली. कश्मीर घाटी में आतंकवादियों के पास पहली बार क्लेमोर माइन मिलने से सुरक्षा एजेंसियों में हड़कंप मच गया है, यह माइन अमरनाथ यात्रा के रास्ते पर शेषनाग के पास रास्ते के पास मिली। इस माइन पर पाकिस्तान ऑर्डिनेंस फैक्टरी का ठप्पा लगा है। सूत्रों की जानकारी दी है कि हथियार की हालत देखकर लगता है कि इसे कुछ समय पूर्व यहां छिपाया गया था।
क्लेमोर माइन का उपयोग नक्सलियों ने तो किया है लेकिन कश्मीर में आतंकवादियों के पास पहली बार यह माइन मिली हैं, ऐसाी माइन का उपयोग सेनायें करती हैं, में नियंत्रण रेखा पर सौजियां के पास पाकिस्तानी सेना ने ऐसी ही एक माइन लगाई थी, जिसमें दो लोग मारे गये थे।
पहाडि़यों की तलाशी मिली स्नाइपर रायफल, एक आईईडी
इसी हफ्ते अमरनाथ यात्रा के रास्ते की सुरक्षा में तैनात सैनिकों ने आसपास की पहाडि़यों की तलाशी ली तो उन्हें आतंकवादियों द्वारा छिपा कर रखे गये कई हथियार मिले हैं। इनमें एक स्नाइपर रायफल, एक आईईडी थी। लेकिन जिस बरामदगी ने सबको चौंकाया है वह थी पाकिस्तान की सेना के उपयोग में आने वाली क्लेमोर माइन जिस जगह पर यह हथियार छिपा कर रखे गये थे उसके पास से ही अमरनाथ यात्रा का रास्ता निकलता है। जाहिर है कि यह बेहद खतरनाक हथियार अमरनाथ यात्रियों की बड़े पैमाने पर हत्यायें करने के लिये छिपाया गया था।
क्लेमोर माइन बहुत खतरनाक है
क्लेमोर माइन इसलिये ज्यादा खतरनाक होती है, क्योंकि इसमें विस्फोट के बाद छर्रे या स्प्लिंटर को एक दिशा में मोड़ा जा सकता है। यानी यह किसी बन्दूक की तरह सारे छर्रे अपने निशाने की ओर फेंकती हैं। इसे जमीन के अलावा किसी पेड़ पर भी लटकाया जा सकता है। जो कि सड़क पर विस्फोटकों की तलाश करने वाले सुरक्षा बलों की नजर से बच सकती है। इसे रिमोट से विस्फोट कराया जा सकता है, यानी किसी टिप वायर का उपयोग करके बूबी ट्रैप की तरह भी उपयोग किया जा सकता हैं।
क्लेमोर माइन का उपयोग सेना दुश्मनों के लिये करती है
अक्टूबर 2003 में आंध्रप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री चन्द्रबाबू नायडू पर हुए क्लेमोर माइन के हमले ने उन्हें बुरी तरह से घायल कर दिया था क्लेमोर माइन का उपयोग अक्सर सेनायें ऐसे रास्ते पर करती हैं, जहां से दुश्मन के आने की आशंका हो, इस मान के विस्फोट से छर्रे 100 से 200 मीटर तक जाते हैं और वह भी 60 डिग्री का कोण बनाते हुए फनल के आकार में। यानि इन माइन के विस्फोट से सामने से आते हुए 100 से 200 मीटर के दायरे मेंआने वाले किसी व्यक्ति के बचने की कोई गुंजाइश नहीं हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *