गांधी जी के दर्शन को अपने जीवन में उतारना चाहिये-राजाबाबू सिंह, एडीजी

 

ग्वालियर. हमारे देश साधुओं का एक ऐसा वर्ग है जिनकी ऊर्जा का उपयोग देश के विकास और लोगों में अनुशासन का संदेश देने के लिये करना चाहिये। यह उद्गार केआरजी कॉलेज में ‘‘21वीं सदी का भारत, गांधी दर्शन एवं गीता प्रासंगिकता’’ विषय पर आयोजित परिचर्चा में बतौर मुख्य अतिथि एडीजी राजाबाबू ने हजारों छात्राओं से खचाखच भरे हॉल में छात्राओं को संबोधित करते हुए कहीं। कार्यक्रम की अध्यक्षता विधायक प्रवीण पाठक और विशेष अतिथि एडिशनल डायरेक्टर एमआर कौशल, संजय स्वर्णकार, प्राचार्य मंजू दुबे, कार्यक्रम संयोजक डॉ. उर्मिला सिंह तोमर उपस्थित रहें। कार्यक्रम का संचालन डॉ. कृष्णासिंह ने किया।
मुख्य अतिथि एडीजी राजाबाबू सिंह ने कहा कि हमारे देश जनसंख्या विस्फोट एक भयंकर समस्या है हमंें इससे जूझना होगा। अभी हाल ही में भिण्ड में एक कार्यक्रम में शामिल होने के लिये गया था वहां पर साधुओं को भी बुलाया गया था मैंने साधुओं की ऊर्जा को समाज के निर्माण में लगाया जाना चाहिये । तब मैंने साधुओं को सात सूत्रीय फार्मूला दिया था।
पानी की खेती
आने वाले समय पानी की उपयोगिता दिनों दिन बढ़ रही है हमंे पानी को सहज कर रखना होगा और हमें पानी की खेती करना चाहिये। चारों ओर पानी के स्त्रोत सूख रहें हमें हर घर वाटर हार्वेस्टिंग कराना और तालाबों पर किये जा रहे अतिक्रमण से मुक्त कराना चाहिये। हमें पानी का सम्मान करना चाहिये।
मुझे जिनेवा में संबोधित करना है
गांधी जी का जन्म गुजरात के पोरबंदर में 2 अक्टूबर 1959 में हुआ था और हम गांधी जी की 150 वीं जयंती वर्ष भर मना रहे हैं। आपको बता दूं कि मुझे 27 सितम्बर 2020 को मुझे गांधी के जीवन दर्शन पर संबोधित करने के लिये जिनेवा में आमंत्रित किया गया है।
बेरोजगारी एक समस्या है
मैं जब भी गांव जाता हूं तो मुझे 10वीं और 11वीं पास किये हुए लड़के मिलते हैं सभी को सरकारी नौकरी चाहिये। ऐसे में शिक्षा को रोजगारोन्मुखी बनाना चाहिये जिससे हम बेरोजगारी की समस्या से जूझ सके। युवाओं को रोजगार के लिये तैयार करना होगा। हमारे बुन्देलखंड में न कोई उद्योग न कोई रोजगार हैं हमें डद्योग लगाना चाहिये, जिससे आने वाली पीढि़यों को इस परेशानी से छुटकारा मिल सकें।
पर्यावरण में बढ़ता प्रदूषण
पर्यावरण दिनों दिन दूषित होता जा रहा है दिल्ली की बात करें तो वहां वहां पर छोटे छोटे बच्चों में लंग्स कैंसर की बीमारी देखने को मिल रही हैं। पिछले कुल माह पूर्व हमारी सरकार ने मिलावट खोरों पर नकेल कसना शुरू कर दी है जो लोगों की जिन्दगी में जहर घोल रहे हैं।
आपको अंदर की पुलिस को जगाना होगा
हमारे प्रदेश में पुलिस की जरूरत तब तक नही हैं जिस दिन हमारे अन्दर की पुलिस जाग जायेगी और हमें अपने अन्दर की पुलिस को जगाना होगा। अब आप देखिये जहां भी दंगा होता है तो पुलिस सबसे पहले इन्टरनेट बन्द करती है क्योंकि जैसे दंगा होता है तो लोग सोशल मीडिया पर जहर घोलना शुरू कर देते हैं इससे बचने के लिये इंटरनेट बन्द करना पड़ता हैं। हमें अपने अन्दर अनुशासन जगाना होगा हैं और हम कानून का उल्लघंन नहीं करेंगे तो पुलिस जरूरत क्यों पडेंगी। इसलिये हमें गांधी जी के जीवन दर्शन को अपनी जिन्दगी में उतारना चाहिये।

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