1 अप्रैल से खाताधारकों के खाता नंबर से लेकर आईएफएसी कोड तक सब बदल जाएंगे

नई दिल्ली: आम जनता के लिए यह काम की खबर है। 1 अप्रैल, 2020 से बैंकों का विलय होना है। केंद्र सरकार ने जो घोषणा की थी, उसके मुताबिक इस क्रम में 10 बैंकों का विलय प्रस्‍तावित है। इस विलय के बाद कई बैंकों के खाताधारकों के खाता नंबर से लेकर आईएफएसी कोड तक सब बदल जाएंगे। इससे बड़ी संख्‍या में ग्राहक प्रभावित होंगे और उनके लेनदेन, कारोबार, जीवन पर सीधा असर पड़ेगा। यहां हम आपको बताने जा रहे हैं वे कौन सी बैंकें हैं और किस बैंक का कौन सी बैंक में विलय होना प्रस्‍तावित है।

वित्‍त मंत्रालय की घोषणा के अनुसार आगामी 1 अप्रैल से पंजाब नेशनल बैंक, सिंडिकेट बैंक, इलाहाबाद बैंक, केनरा बैंक जैसी बड़ी राष्‍ट्रीयकृत बैंको का मर्जर होना है। दस बैंकों के मर्जर से चार बड़ी नेशनलाइज्‍ड बैंक वजूद में आएंगी। इस विलय का ग्राहकों पर बहुत असर पड़ेगा। बैंक कर्मचारी यूनियन के सदस्‍यों का कहना है कि मर्जर की इस कवायद के दौरान सबसे ज्‍यादा लोन के मामले और ऑनलाइन ट्रांजेक्‍शन जैसे काम प्रभावित हो सकते हैं। इसका अर्थव्‍यव्‍था पर भी प्रभाव पड़ सकता है।

इन बैंकों के खाता नंबर बदलेंगे

मर्जर की प्रक्रिया में इलाहाबाद बैंक का इंडियन बैंक में विलय प्रस्‍तावित है। वर्तमान में इलाहाबाद बैंक के खाताधारकों का खाता नंबर 11 अंकों का होता है। मर्जर के बाद यह बदल जाएग और इंडियन बैंक के नियम के अनुसार 12 अंकों का हो जाएगा। इसी प्रकार पंजाब नेशनल बैंक में अभी 16 अंकों का अकाउंट नंबर होता है। मर्जर के बाद इसमें ओरिएंटल बैंक ऑफ कॉमर्स एवं यूनाइटेड बैंक ऑफ इंडिया का मर्जर होना है। इनके खाताधारकों के भी अकाउंट नंबर बदल जाएंगे। इस क्रम में सिंडिकेट बैंक का मर्जर केनरा बैंक में एवं आंध्रा बैंक, कार्पोरेशन बैंक का विलय यूनियन बैंक में होना है। अभी तक जो तय व्‍यवस्‍था है, उसके अनुसार प्रत्‍येक बैंक का एक आईएफएससी कोड होता है लेकिन मर्जर की प्रक्रिया आरंभ होने के बाद नई बैंकों का आईएफएससी कोड ही मान्‍य किया जाएगा। इसका ग्राहकों के कारोबार एवं लेनदेन पर सीधा असर पड़ सकता है।

खातों को अपडेट करना होगा

बैंकों के विलय के बाद ग्राहकों के खाते नंबर बड़ी संख्‍या में बदल सकते हैं, इसके चलते उन्‍हें नंबरों को एवं खातों को अपडेट करवाना होगा। अधिकांश ग्राहकों के बैंक अकाउंट नंबर कई स्‍थानों पर लिंक होते हैं। उनके नंबर एलपीजी सिलेंडर की सब्सिडी से लेकर स्‍कॉलरशिप आदि में लिंक होते हैं। बैंकों के विलय के बाद से इन सबको अपने नंबर बदलवाते हुए इन्‍हें दोबारा अपडेट कराना पड़ सकता है। इस संबंध में मुरादाबाद के जिला अग्रणी बैंक प्रबंधक सतीश कुमार गुप्‍ता का कहना है कि सरकार की यह कोशिश है कि मर्जर के दौरान ग्राहकों को अधिक असुविधा ना हो। प्रवर्तक बैंक के ही आईएफएससी कोड एवं अकाउंट नंबर उसमें लागू हों, ऐसे प्रयास जारी हैं।

 

 

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