लोकायुक्त ने दिए डीजी मधुकुमार के खिलाफ जांच के आदेश

भोपाल। लोकायुक्त नरेश गुप्ता ने एडीजी वी मधुकुमार के खिलाफ जांच के आदेश दिए हैं। मीडिया में प्रकाशित खबरों को आधार बनाकर उन्होंने इस मामले में संज्ञान लिया है।मधुकुमार का एक वीडियो रविवार को वायरल हुआ था जिसमें वे पुलिस अधिकारियों से लिफाफा लेते नजर आ रहे थे। इसके बाद सरकार ने उन्हें परिवहन आयुक्त के पद से हटाकर पुलिस मुख्यालय में पदस्थ कर दिया था। यह जांच पुलिस अधीक्षक स्तर के अधिकारी करेंगे।

आइपीएस वी. मधुकुमार के लिफाफे लेने का वायरल वीडियो चर्चा में है। वीडियो कहां और किस सर्किट हाउस का है, इसे लेकर अधिकृत पुष्टि नहीं हुई है, किंतु वीडियो में दिख रहा कक्ष, पलंग हूबहू आगर सर्किट हाउस के कक्ष क्रमांक एक की तरह है। खास बात यह भी है कि वीडियो 2016 का बताया जा रहा है। उस दौरान मधुकुमार उज्जैन रेंज के आइजी थे। वे 30 जनवरी 2016 को आगर आए थे।

उस वक्त उन्होंने वही पेंट-शर्ट और जैकेट पहनी थी, जो वायरल वीडियो में दिख रही है। वहीं वीडियो में लिफाफा देते दिख रहे निरीक्षक भी उस समय आगर जिले के थाने में पदस्थ थे। इसमें एक थाना प्रभारी तो स्पष्ट पहचान में आ रहे हैं। वीडियो को लेकर विभिन्न स्तर से पड़ताल की जा रही है।

वी. मधुकुमार उज्जैन आइजी के रूप में आगर आए थे तो उन्होंने सिंहस्थ की पूर्व तैयारियों के अंतर्गत पड़ाव क्षेत्र का निरीक्षण भी किया था। इसी दिन सर्किट हाउस पर पत्रकारों से भी चर्चा की थी। उस दौरान आगर एसपी के रूप में एसपी आरएस मीणा पदस्थ थे।

मीणा की पत्नी भाजपा से चांचौड़ा विधायक रह चुकी हैं। हालांकि इस बात की पुष्टि नहीं हुई है कि यह वीडियो आगर के सर्किट हाउस का होने के साथ 30 जनवरी 2016 का ही है।

वीडियो कैसे और क्यों बना? सूत्रों का कहना है कि वीडियो बनने के कुछ समय बाद ही इसकी जानकारी कुछ लोगों को लग गई थी, जिसके बाद कोई रास्ता निकाला गया और चार साल तक यह वीडियो दबा रहा। किसी विशेष उद्देश्य को लेकर अब वीडियो को वायरल कराया गया है। वीडियो बनने और वायरल होने में वरिष्ठ पुलिस अधिकारी की भूमिका बताई जा रही है।

 

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